अश्रुपूरित
नयन मेरे, हृदय भावविभोर,
करजोर करूँ विनती तेरी, हे मेरे रणछोड़।
करजोर करूँ विनती तेरी, हे मेरे रणछोड़।
हृदय विदीर्ण, मन
विह्वल, संशय समर, रुदन चहुओर,
हर लो कष्ट, करो तृष्णा मुक्त, हो आत्मा का, पथ प्रशस्त।
हर लो कष्ट, करो तृष्णा मुक्त, हो आत्मा का, पथ प्रशस्त।
गंगा है जिसकी दासी,
नौ नभ, दस दिश के तुम स्वामी,
हर लोक तुमसे, तुम ही हो इस ब्रह्माण्ड के सकल निवासी,
धरो काल रूप, करो ध्वल स्वरूप, हो कालिमा का पूर्ण नाश,
फिर फैले प्रकाश पुंज, अविनाशी सत्य का हो अनंत राज,
इस चराचर जगत में तुम वास करो,
ये अश्रुपूरित नयन तुम्हारे चरण पखारे,
हे कमलनयन, माखनचोर अब इस जग क्रंदन को शांत करो,
हे मेरे मन के सम्राट, सहस्त्र कोटि नमन तुम स्वीकार करो।।
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