ये जन्मदिवस, ये नव प्रभात
आयी लालिमा सूरज की, मिटा जगत का अंधकार,
कुछ पुष्प खिले, कुछ खग किलके,
खुशियों की हो असंख्य बौछार,
पुलकित जीवन, अपार हर्ष,
उम्र का अगला ठहराव।
यह है एक बुझता दिया,
मिले सीमित मोती, कर्तव्य हज़ार,
गिन गिन कर तू खर्च इसे,
कर दूसरों की और खुद को पा।
है मानव तन, इक नश्वर माया,
आत्मज्योति है सत्य की छाया,
कलुषित न हो यह परम नीधि,
समझा जो वो प्रभुपद पाया।
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