सागर
की लहरें आती हैं,
करने नमन किनारों को,
और बिखड़ जाती हैं,
न्योछावर कर अर्जित सर्वस्व ।
करने नमन किनारों को,
और बिखड़ जाती हैं,
न्योछावर कर अर्जित सर्वस्व ।
सतत
प्रयत्न, निःस्वार्थ भाव,
कोई सिख
सके तो सीखे इनसे,
बिना आश के, कर्तव्य पथ पे,
कार्यरत हैं, ये अनंत काल से।
बिना आश के, कर्तव्य पथ पे,
कार्यरत हैं, ये अनंत काल से।
आंखों में सजी इंतजार की बूंदें,
और
व्यथित हृदय से उठती हुँकार,
है लेती सबक, उस अथाह समुंद्र से,
जिससे उठती प्रचंड लहरें,
देतीं है शक्ति अपार ।
है लेती सबक, उस अथाह समुंद्र से,
जिससे उठती प्रचंड लहरें,
देतीं है शक्ति अपार ।
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