उलझी हुई जिंदगी को सुलझाने चला,
हर कठिनाई को अब आजमाने चला,
वक्त के हर इम्तिहान से गुजर जाने चला,
साँसों की गठड़ी को लुटाने चला।।
हर कठिनाई को अब आजमाने चला,
वक्त के हर इम्तिहान से गुजर जाने चला,
साँसों की गठड़ी को लुटाने चला।।
ऐ गम, तू मुझसे न रुस्वा हो,
मुझे अब खुशियों की दरकार नहीं,
2-4 पल ठहर, मैं भी चलता हूँ,
ये जिंदगी का सफर, अब यहीं।।
मुझे अब खुशियों की दरकार नहीं,
2-4 पल ठहर, मैं भी चलता हूँ,
ये जिंदगी का सफर, अब यहीं।।
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