है मृत्यु मुझे पसंद,
कर्तव्य पथ पर गतिशील,
करूँ वरण मैं उसका रणभूमि में,
चिर निंद्रा पाऊँ धर्म ध्वजा तले,
कर्तव्य पथ पर गतिशील,
करूँ वरण मैं उसका रणभूमि में,
चिर निंद्रा पाऊँ धर्म ध्वजा तले,
अभीष्ट पथ निष्कंटक हो,
घोषणा करते शंख, नगारे और दुंदुभि,
दुश्मनो की छाती पर पग रख,
वीर अग्रसर होते जाते,
घोषणा करते शंख, नगारे और दुंदुभि,
दुश्मनो की छाती पर पग रख,
वीर अग्रसर होते जाते,
है दावानल यह वीरों के तेज का,
विकल प्रतिद्वंदी भष्म हो रहे हवन बन,
यह काल यज्ञ है,
अनन्त प्रयोग है,
विकल प्रतिद्वंदी भष्म हो रहे हवन बन,
यह काल यज्ञ है,
अनन्त प्रयोग है,
आज होगी विजय एक की,
दूजे की संगिनी मृत्यु होगी,
दोनो लिखेंगे अमर गाथा,
जो काल बंधन से मुक्त प्रिय होगी,
दूजे की संगिनी मृत्यु होगी,
दोनो लिखेंगे अमर गाथा,
जो काल बंधन से मुक्त प्रिय होगी,
अब अंतिम गीत हम सभी गाते हैं,
चरणों में तेरे शीश नवाते हैं,
हमारी लहू से माँ अभिषेक हो तेरा,
शीश अर्पण कर तुझसे आज्ञा पाते हैं,
चरणों में तेरे शीश नवाते हैं,
हमारी लहू से माँ अभिषेक हो तेरा,
शीश अर्पण कर तुझसे आज्ञा पाते हैं,
हो पुनः जन्म,
आँचल हो मां तेरा ही,
इस मिट्टी में ही खेलूँ,
इस मिट्टी को ही अंत मे पाऊँ।।
आँचल हो मां तेरा ही,
इस मिट्टी में ही खेलूँ,
इस मिट्टी को ही अंत मे पाऊँ।।
- निरज
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