Friday, January 2, 2015

आओ अब सिंहनाद करें

याद करें उन वीरों को,
जिन्होंने झेले थे विष बुझे तीरों को,
हँसते-हँसते चढ गये शूली,
बिना झिझके, बिना सिसके,
उन बलिदानों को याद करें,
आओ अब सिंहनाद करें ।

देश खड़ा चौराहे पे,
माँग रहा जीवन का हक,
चलो सींच दें अपनी लहू से,
इस वसुंधरा के खलिहानों को,
बिना झिझके, बिना सिसके,
उन बलिदानों को याद करें,
आओ अब सिंहनाद करें ।

अडिग हिमालय की चोटी से,
महासमुंद्र की जलधारा तक,
आओ दुष्टों का सर्वनाश करें,
नवजीवन का प्रवाह करें,
बिना झिझके, बिना सिसके,
उन बलिदानों को याद करें,
आओ अब सिंहनाद करें ।

माँ भारती के पुत्र दौड़ चले हैं,
स्वर्ण सिंहासन इसके सजाने,
फड़क उठा है अंग-अंग,
जागृत भारत मचलने लगा है,
आओ गुँजा दे चराचर धरा को,
माता के जयकारों से,
बिना झिझके, बिना सिसके,
उन बलिदानों को याद करें,

आओ अब सिंहनाद करें ।

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