Saturday, June 12, 2010

बिरहीन


पिपल के पतवा पर, लिखली तोहर नाम

तु बालम भुल गइल, हम के तमाम

चैइत में चलेला जब, पुरवा बयरिया ।

दिलवा में उठेला, हुक रे सावरीयॉ ।।

निरमोहिया.......................

हाय रे निरमोहिया.......................

रोज-2 लिखिले हम, चिठ्ठिया तहरा नाम के

एको ना आइल अबले, खतीया जवाब के ।

भइल बानी बिरहीन, हम वो सावरीयॉ

काहे ना आवत बार, ताकिले डगरिया ।।

निरमोहिया.......................

हाय रे निरमोहिया.......................

आमवा के गछिया पे, लागल बा मोजरीया

हमरो त आँचल बाटे, सुना वो सावरीयॉ ।

जब हम देखीले, केहुके पुतवा

छतिया से गिरेलागे, दुधवा के लड़ीया ।।

निरमोहिया.......................

हाय रे निरमोहिया.......................

लागताटे आ गइल, मरे के बेड़ा

तरपत-2, छुटताटे डेड़ा ।

बनल रह दुनिया में, इहे दुआ बाटे

एक बिड़हीन के, नेह छुटताटे ।।

निरमोहिया.......................

हाय रे निरमोहिया.......................

निरज कुमार सिंह


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