Saturday, January 2, 2016

मेरी हिमाचल यात्रा (दूसरा दिन, मकलॉड गंज और वाटर फाल की यात्रा)


अगली सुबह उठ कर हमलोग नित्य क्रिया से निवृत हुए और स्नान-ध्यान के बाद तैयार होकर जलपान के लिए पुनः बाजार का रुख किया. जलपान में हमें पराठा और दही मिला. उसके बाद मकलॉड गंज जाने को तैयार हुए और बस पकड़ने के लिए वही नजदीक एक चौक पर खड़े हो गए. थोड़ी देर में ही हमें हमरे गंतब्य को ले जाने वाली बस आ गयी. हम सभी उस पर सवार हो गए. इस समय हमलोग एक नयी उर्जा, नया उमंग महशुश कर रहे थे. हमारी बस पहाड़ के घुमावदार रस्ते से होते हुए ऊपर पहाड़ पर चढाने लगी.

यहाँ मैं आपको यह बता दूं की मकलॉड गंज, धर्मशाला जिले में स्थित एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है जो पहाड़ों की चोटी पर बसा हुआ है. यह मुख्यत बौध धर्मगुरु दलाई लामा का निवास स्थान होने के कारण प्रसिद्ध है. यहाँ एक बौद्ध मंदिर भी है. यहाँ आपको तिब्बती लोग बहुतायत में देखने को मिलेंगे और यहाँ के बाजार में भी तिब्बती और बौद्ध धर्म से जुड़े वस्तुओं की भरमार देखने को मिलेगी.

लगभग आधे घंटे की बस यात्रा के दौरान नयनाभिराम दृश्यों को देखते हुए हम अब मकलॉड गंज बस अड्डे पहुँच चुके थे. सबसे पहले हमने बौद्ध मंदिर जाने की सोची. बाजार होते हुए हम मंदिर पहुंचे, बहुत ही स्वच्छ वातावरण था, वहां की अभूतपूर्व शान्ति ने हमारा मन मोह लिया. भगवान बुद्ध एवं अन्य भद्रजनों की प्रतिमाएं देखकर शरीर रोमांचित हो रहा था. वहीं पूज्य दलाई लामा का निवास स्थल, जो अपने आप में बौद्ध धर्मावलम्बियों के लिए तीर्थस्थल से कम् नहीं है, एक सुखद आश्चर्य से कम नहीं था. धुंध और कोहरे पहाड़ी दृश्यों को पल-पल बदल कर एक अलग ही अनुभव दे रहे थे.

उसके बाद हमने भागसूनाग मंदिर जो कि एक शिव मंदिर है और उसी रस्ते में थोड़ी और आगे स्थित भाग्सू झड़ने जाने का मन बनाया. ऑटो स्टैंड से हमने भागसूनाग मंदिर जाने के लिए ऑटो लिया. वहां पहुंचकर हमने भगवान् शिव का दर्शन किया. अब तक बूंदा-बांदी फिर से शुरू हो चुकी थी. यहाँ पर एक तरन-ताल भी था. समय तो सुबह का ही था परन्तु ठंढ बहुत बढ़ चुकी थी. थोडा समय यहाँ रुकने के बाद हम आगे की ओर बढ़ चले. भागसू झड़ने की तरफ जाने वाले रास्ता हमें पैदल ही तय करना था क्योंकि वहां कोई भी गाड़ी नहीं जा सकता थी. धीरे-धीरे हम उस पहाड़ी रस्ते पर आगे बढ़ने लगे. रस्ते बहुत ही संकड़ा था, उसके एक तरफ पहाड़ तो दूसरी तरफ गहरी खाई थी. झड़ने का पानी निचे एक पतली धारा के रूप में प्रवाहित हो रहा था. बिच-बिच में कोहरे का आना जाना भी लगा हुआ था.

 

बड़ी सावधानी के साथ हम टेढ़े-मेढ़े रस्ते पर चलते हुए झड़ने के पास पहुंचे. यहाँ का नजारा बहुत ही लुभावना था. कुछ लोग झड़ने में जलक्रीडा कर रहे थे. हमने वहा थोड़ी देर समाय गुजारा. कुछ याद स्वरुप तस्वीरें ली फिर वापस चल पड़े. अब तक हम सभी बहुत ही थक चुके थे.
 
मकलॉड गंज वापस लौट बाजार से हम सबने कुछ खरीददारी की. किसी ने शाल, किसी ने थैला, मैंने पीतल की एक प्रतिमा खरीदी. अब हम वापस होटल लौटना चाहते थे. बस स्टैंड आने पर पता चला अभी निचे जाने के लिए बस जाने में देरी है. थोरी दुरी पर हमें एक चर्च दिखा. हमने वो देखने का निश्चय किया और सोचा वही से बस ले लेंगे. चर्च पुराना था. यह एक पुरानी इमारत थी जो बहुत बड़ी तो नहीं पर आकर्षक जरुर थी. उसका स्थापत्या कला मुझे बहुत पसंद आया. चर्च के पिछले हिस्से में जेम्स ब्रूस (viceroy and governor general of India) का कब्र था. 

जब हम यहाँ से चलने को हुए तो तेज बारिश शुरू हो गयी, जिस कारण हमे वही बने एक बस पड़ाव में ठहरना पड़ा. लगभग आधे घंटे के बाद एक बस आ गयी, हम सभी उसपर सवार हो होटल की ओर चल पड़े. जब हम होटल के पास पहुंचे तब  भी बारिश वैसी ही तेज हो रही थी. बस से उतारकर हम सड़क के दूसरी ओर स्थित एक चाय दूकान पर गए. वहां रूककर हम सभी ने चाय पी और हल्का नास्ता किया, तब जाकर थोरी ठंढ कम हुई. अब बारिश भी कम हो चली थी, हम सब होटल आकर विश्राम करने लगे.

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