हमारे गाँवों, छोटे शहरों यहाँ तक की बड़े शहरों के भी अधिकांश विद्यालयों (एवं विश्वविद्यालयों) में हिन्दी का प्रयोग होता है। हमारे ज्यादातर शिक्षक, विद्यार्थीयों के साथ ज्ञान का आदान प्रदान भी हिन्दी में ही करते हैं। १० वीं कक्षा तक हमारे सारे विषयों के किताब भी अभी तक हिन्दी में ही उपलब्ध हैं। और आगे की पढाई के लिए जब ये बच्चे शहरों की तरफ रुख करते हैं तो उन्हें नये माहौल, नई शिक्षा पद्धती और अपने भविष्य की चिंता होती है, जो सिर्फ इस कारण और भी ज्यादा बढ जाती है क्योंकि उन्हें अब अपना माध्यम भी बदलना होता है । यदि अब उन्हें गणित,भौतिकी या रसायन शास्त्र पढना है तो उन्हें इन विषयों से ज्यादा अंग्रेजी भाषा पर ध्यान देना पड़ता है, क्योंकि अब सारे विषयों के किताब हिन्दी मे न होकर अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध होते हैं। यदि हम उन्हें उनके विषय संबंधी अच्छी पुस्तकें हिन्दी में उपलब्ध करा सकें तो निश्चय ही वे उस पर ज्यादा पकड़ बनाने में कामयाब होंगे, जो की दुसरी भाषा के कारण नहीं हो पा रहा था। इस संबंध में दुसरे देशों जैसे रुस, जापान, चीन या फ्रांस को हम उदाहरण के तौर पे ले सकते हैं, जिन्होंने अपनी स्थानीय भाषाओं के बल पे, अपने को दुनिया के उन गिने चुने अग्रणी देशों के कतार में ला खड़ा किया जिनके पीछे आज सारी दुनिया खड़ी है ।
Saturday, September 26, 2009
हिन्दी भाषा में विज्ञान और तकनीक लेखन का महत्व
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